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शेयर प्राइस और मार्केट कैपिटलाइजेशन क्या होता है? Tips and Tricks

शेयर प्राइस क्या होता है? और मार्केट कैपिटलाइजेशन क्या होता है?

इस आर्टिकल मैं आपसे काफी “सिंपल बट एट द सेम टाइम” काफी इम्पोर्टेन्ट कॉन्सेप्ट के बारे में बात करने वाला हूँ, शेयर मार्केट रिलेटेड। हम बिल्कुल बेसिक की बात करेंगे। शेयर प्राइस क्या होता है? और मार्केट कैपिटलाइजेशन क्या होता है? इसका कॉन्सेप्ट समझेंगे। 

अब देखिए ये हो सकता है, सुनने में आपको काफी सिंपल लगे। बट मैं आपको फिर भी बता दूँ की काफी सारे पढ़े लिखे लोगों को भी ये चीजें ठीक से समझ में नहीं आती है। मेरे खुद के फैमिली में भी बहुत सारे एग्जाम्पल है, जो दूसरों के कहने पे शेयर्स में इन्वेस्ट कर चूके हैं और हज़ारों लाखों का नुकसान करा चूके हैं। आपके भी आसपास काफी सारे ऐसे एग्जाम्पल्स होंगे। 

उदाहरण के तौर पे मान लीजिये दो कंपनियां हैं, एक कंपनी का स्टॉक ₹50 का है और दूसरी कंपनी का शेयर ₹500 का है तो काफी लोग सोचते है की ₹50 का अगर शेयर है, तो वो डेफिनेट्ली 500 तक जाने की उसकी काफी ज्यादा टेंडेंसी है, ज्यादा ग्रोथ मिलने के चान्सेस है। ₹500 का शेयर 5000 का हो सकता है, बहुत ज्यादा टाइम में जाए। बट क्या ये सही कंपैरिजन है? 

इस आर्टिकल में आप समझ जाएंगे की ये सही कंपैरिजन डेफिनेटली नहीं है और एग्ज़ैक्ट्ली शेयर प्राइस का मतलब क्या है? मार्केट कैपिटलाइजेशन का क्या मतलब है? इसको मैं आपको एक कम्पेरिज़न से भी समझाऊंगा की जब आप रियल एस्टेट खरीदते हैं तो आप कैसे खरीदते हैं? लेकिन आप स्टॉक मार्केट जब खरीदते हैं तो आप कितनी बड़ी गलतियाँ कर देते हैं? आप ठीक से शायद कंपैरिजन नहीं करते है। 

शेयर मार्केट के आप पहले बेसिक जानिए। उसके बाद आप इन्वेस्ट करेंगे तो आई ऐम शुर। आप काफी अच्छा रिटर्न कमा पाएंगे।  

शेयर प्राइस और मार्केट कैपिटलाइजेशन क्या होता है? 

शेयर प्राइस और मार्केट कैपिटलाइजेशन को हम एक एग्जाम्पल से समझते हैं। मान लीजिए दो कम्पनीज़ है एक कंपनी का नाम है ABC कंपनी और दूसरी कंपनी है XYZ अब दोनों के शेयर प्राइस मैं थोड़ा सा फर्क है। एक ABC कंपनी का जो शेयर है वो ₹10 का एक शेयर है, तो पर शेयर प्राइस जो है, वो ₹10 है और दूसरी कंपनी है जो XYZ है। इसका जो प्राइस है, एक शेयर का वो ₹100 है। 

तो अब बहुत सारे लोग सोचेंगे की ये एक शेयर सिर्फ ₹10 का मिल रहा है, तो यह सस्ता है। ये हम ज्यादा खरीद लेते हैं। इसके बढ़ने के चांस बढ़ जाएंगे क्योंकि ये सस्ता मिल रहा है आज की डेट में और दूसरी और ये क्योंकि ₹100 का है ये तो ऑलरेडी बहुत ज्यादा महंगा शेयर है तो इसको हम नहीं खरीदते हैं। इसके ग्रोथ के चान्सेस कम है। पर क्या ये सही कम्पेरिज़न है? जी नहीं, ये बिल्कुल सही कंपैरिजन नहीं है, क्योंकि यहाँ पे हमारे पास पूरी इन्फॉर्मेशन नहीं है तो हम ये नहीं बता सकते कि कौन सा शेयर सस्ता है और कौन सा महंगा है। 

मैं आपको इसको एक एग्जाम्पल से समझाता हूँ, मान लीजिए आप जब घर खरीदने के लिए जाते है, तो एक घर है, अगर हम प्राइस का कंपैरिजन करें। एक घर की वैल्यू है ₹30,00,000 और दूसरे घर की वैल्यू है ₹50,00,000। अब आप क्या? कहेंगे कि कौन सा घर सस्ता है? अब अगेन यहाँ पे भी इन्फॉर्मेशन कम है 

तो हमारे को नेक्स्ट इन्फॉर्मेशन चाहिए कि इसका एरिया कितना है? ये जो घर है इसका एरिया कितना है? चलिए मैं ये भी आपको इन्फॉर्मेशन दे देता हूँ, मान लेते है की एरिया भी दोनों का बराबर हैं। 1000-1000 स्क्वायर फ़ीट हम पकड़ लेते हैं दोनों का एरिया है। 

तो आप नेक्स्ट इन्फॉर्मेशन मैं मांगेंगे की अब इसका प्राइस पर-स्क्वायर फ़ीट आप कैलकुलेट कर लेंगे राइट तो ये 30,00,000 को आप 1000 से डिवाइड करेंगे तो ये आपका प्राइस पर स्क्वायर फ़ीट ₹3000 निकल के आ जाएगा और यहाँ पे आपका जो प्राइस पर स्क्वायर फिट निकल के आएगा वो 5000 आएगा। अब भी आप कहेंगे की ये ₹3000 का तो मेरे को सस्ता पड़ रहा है और ये ₹5000 का महंगा है? जी नहीं, फिर से ये इन्फॉर्मेशन कम है। 

अब दूसरी इन्फॉर्मेशन आपको चाहिए। ये कौन सी लोकेशन में है? मान लेते हैं ये जो हाउस A है ये कानपुर सिटी में है, मान लेते हैं हम। और ये जो हाउस B है यह आपका दिल्ली एनसीआर में किसी सिटी में है। अब नैचरल सी बात है कि कानपुर के अंदर रेट्स कम है, और दिल्ली एनसीआर के अंदर ज्यादा है। 

अब देखिये आप कैसे कंपेर करेंगे। अब आपको एक और इन्फॉर्मेशन चाहिए की कानपुर जैसी सिटी में ऐवरेज प्राइस कितना है? मान लेते हैं ऐवरेज प्राइस है वहाँ पे ₹2500 और दिल्ली एनसीआर में आप जीस लोकेशन में देख रहे हैं। उस एरिया में ऐवरेज प्राइस है ₹7000 अब आप बताइए कौन सी प्रॉपर्टी सस्ती हुई और कौन सी महंगी हुई? 

देखिए कानपुर के इस लोकेशन में जहाँ पे आप ये मकान खरीद रहे हैं, वहाँ पे ऐवरेज प्राइस ₹2500 है और आप खरीदने वाले हैं उसको ₹3000 पर स्क्वायर फिट के अंदर तो ये कोई सस्ती डील तो हुई नहीं? आप के लिए। 

सिमिलरली आप जब दिल्ली एनसीआर की उस लोकेशन में खरीद कर रहे हैं तो आप का ऐवरेज प्राइस 7000 है और आपको ये 7000 के कंपैरिजन में सस्ता पड़ रहा है, तो आप नैचरल सी बात है, आप ₹5000 पर स्क्वायर फिट पे जाएंगे, तो अगर आपके पास ₹50,00,000 होंगे, तो आप इन्वेस्ट करेंगे इस वाले मकान पे, जो आपको ₹5000 पर स्क्वायर फिट में मिल रहा है क्योंकि उसके बढ़ने के चान्सेस बहुत ज्यादा है। 

5000 से ₹7000 जाने के चान्सेस बहुत ज्यादा है। अब आप जो चीज़ ऑलरेडी महंगी खरीद रहे हैं वो कितनी ऊपर चली जाएगी? आप ऑलरेडी मार्केट प्राइस से ज्यादा पे खरीद रहे हैं क्योंकि 2500 ऐवरेज प्राइस है, और आप 3000 में खरीद रहे हैं। 

सेम कॉन्सेप्ट शेयर मार्केट में ऐप्लिकेबल होता है। आप ये नहीं कह सकते हैं खाली शेयर प्राइस देख के की वो महंगा या सस्ता है। 

दूसरी इन्फॉर्मेशन आपको चाहिए कि नम्बर ऑफ शेयर्स कितने है? फ्लोटेड उस कंपनी के अब ये मान लीजिये ए बी सी कंपनी, कितने भी शेयर फ्लोट कर सकती है। वो 1,00,000 शेयर भी फ्लोट कर सकती है। वो 1,00,00,000 भी कर सकती है, वो 10,00,00,000 भी कर सकती है। 

मान लेते हैं टोटल नम्बर ऑफ शेयर से, उसने जो फ्लोट करें है वो 1,00,00,000 है और XYZ कंपनी ने जो टोटल नम्बर ऑफ शेयर फ्लोट करें है, वो 5,00,00,000 है। चलिए, अब क्या आप हमें दूसरी इन्फॉर्मेशन चाहिए? अब हम कैलकुलेट करेंगे। मार्केट कैपिटलाइजेशन 

मार्केट कैपिटलाइजेशन क्या होता है? 

शेयर प्राइस को आप नम्बर ऑफ शेयर से मल्टीप्लाई कर देते हैं, तो ये क्या बनता हैं? शेयर प्राइस।  शेयर प्राइस को जब आप नम्बर ऑफ शेयर से मल्टीप्लाई कर देंगे, ये आप की मार्केट वैल्यू निकल के आ जाती है। कंपनी की पूरी की पूरी। 

टोटल नम्बर ऑफ शेयर 1,00,00,000 है तो आपने एक शेयर के प्राइस से मल्टीप्लाई कर दिया, तो टोटल कंपनी की जो ABC कंपनी की वैल्यू है, वो कितनी हो गयी ₹10,00,00,000 उस कंपनी की टोटल वैल्यूएशन हो गई। 

और ये जो XYZ कंपनी है, इसको भी आप मल्टीप्लाई करेंगे, तो इसकी टोटल वैल्यू कितनी हुई? ₹500,00,00,000 हो गई। 

अब क्या आपस में इन दोनों कंपनीस को आप कंपेर कर सकते हैं? जी नहीं आप बिलकुल नहीं कर सकते क्योंकि ये एक बहुत छोटी कंपनी है और यह एक काफी बड़ी कंपनी है। 

इनके सेक्टर्स भी अलग अलग हो सकते हैं। हो सकता है ये एक कोई केबल मैन्युफैक्चरिंग कंपनी हो, कोई प्रिन्टिंग हो। 

500,00,00,000 की कंपनी हो सकता है कोई सॉफ्टवेयर की कंपनी हो। हो सकता है, 500,00,00,000 की कंपनी बहुत ज्यादा तेज ग्रो कर जाए, अगर इकॉनमी अच्छी चलती है तो। 

तो जब आप शेयर प्राइस को सस्ता या महंगा बोलना चाहते हैं तो आपको बहुत सारी चीजें कंपेर करनी होती है। आप कंपैरिजन करते हैं और किस किस चीज़ का कंपैरिजन करते हैं? कई सारी चीजे होती है की प्राइस अर्निंग रेशियो क्या है? उसका प्राइस टु बुक वैल्यू रेशियो कितना है? उसका इस तरीके के बहुत सारे कम्पेरिज़न होते हैं। डैड कितना है? उसका? 

मैं उम्मीद करता हूँ कि आपको अटलीस्ट, मार्केट कैपिटलाइजेशन और शेयर प्राइस समझ में आया। क्या होगा? अब देखिए आप अगर सेंसेक्स की जब बात करते हैं आपने सेंसेक्स के बारे में सुना होगा तो आपको मैं बता देता हूँ। सेंसेक्स में टॉप 30 कंपनी जो होती है मार्केट कैपिटलाइजेशन के हिसाब से मतलब जितनी टॉप कंपनीज है, 30 कम्पनीज़ है उसके हिसाब से ये आपका सेंसेक्स होता है, एक इंडेक्स होता है तो उसके अंदर टॉप 30 कंपनी की वैल्यू ली जाती है। सिमिलरली निफ्टी के अंदर टॉप 50 कंपनी जो होती है मार्केट कैपिटलाइजेशन के हिसाब से उनकी वैल्यू ली जाती है। 

अब अगर हम मोस्ट वैल्यूड कंपनी इंडिया में बात करें तो रिलायंस बहुत टाइम तक मोस्ट वैल्यूड कंपनी थी, जिसको अभी टीसीएस ने रिप्लेस कर दिया है। तो जब हम ये वैल्यू की बात कर रहे होते हैं तो आप ध्यान रखिएगा आप यहाँ पे मार्केट कैप की बात कर रहे होते है। इसको हम शोर्ट फॉर्म में मार्केट कैप भी कहते हैं। 

हम मार्केट कैपिटलाइजेशन की बात करते हैं। जब हम किसी कंपनी की वैल्यू की बात करते हैं तो और दूसरा आपको मार्केट वैल्यू और बुक वैल्यू में कन्फ्यूज़ नहीं होना है बुक वैल्यू अकाउंटिंग के हिसाब से जो वैल्यू होती है वो होती है और मार्केट कैप जो होता है वो आपकी बेसिकली मार्केट वैल्यू होती है। मार्केट के हिसाब से। 

जैसे मैंने यहाँ बताया है की ये मार्केट कितनी वैल्यू लगा रही है, उसकी वो वैल्यू होती है आपकी मार्केट कैपिटलाइजेशन और हमने जैसा फॉर्मूला देखा। आप शेयर प्राइस को नम्बर ऑफ शेयर से मल्टीप्लाई कर देते हैं तो आपको मार्केट कैपिटलाइजेशन मिल जाता है। 

आई होप आपको मार्केट कैपिटलाइजेशन और शेयर प्राइस एक्जैक्टली क्लियर हो गया होगा। अब नेक्सट आर्टिकल में हम लार्ज कैप, मिड कैप और स्मॉल कैप की बात करेंगे। कि आखिर इनकी क्या डेफिनिशन हैं? क्या इनकी कोई एग्ज़ैक्ट डेफिनेशन है या ये डेफिनेशन वेरी करती रहती है? इसपे भी काफी कन्फ्यूजन हो जाता है, लोगों का। 

उम्मीद करता हूँ कि ये आर्टिकल आपको पसंद आया होगा तो इसको शेयर और कॉमेन्ट जरूर कर लें। अगर आपके कुछ सुझाव हैं या आपको एक टॉपिक सजेस्ट करना चाहते हैं फ्यूचर आर्टिकल के लिए तो आप नीचे कमेंट सेक्शन में कर सकते हैं। मिलते है। अगले आर्टिकल में तब तक सीखते रहिए, कमाते रहेंगे और हमेशा की तरह खुश रहिये। धन्यवाद।

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