NAV और NFO क्या है? म्यूचुअल फंड का पूरा सच जानिए
म्यूचुअल फंड्स को लेके एक इन्वेस्टर के मन में हमेशा बहुत सारे डाउट्स रहते हैं। क्या LOW NAV वाला फंड बेटर है? क्या आपको न्यू फंड ऑफर (NFO) में इन्वेस्ट करना चाहिए? एक पोर्टफोलियों में कितने सारे फंड होने चाहिए? जानेगे इन सारे सवालों के जवाब और बहुत कुछ इस आर्टिकल से।
NAV Mutual Fund Meaning? NAV क्या है?
How to calculate NAV in mutual fund?
क्या ज्यादा यूनिट्स लेने से आपको कोई फायदा होता है?
What is the NFO in Mutual Fund
क्या NFO में निवेश करना चाहिए?
देखिये जब भी कोई कंपनी NFO लॉन्च करती है तो पब्लिक से ज्यादा से ज्यादा पैसा खींचने के लिए वो दो चीजें करती है।
पहला: NFO का खूब प्रचार करती है। हर जगह आपको NFO की चर्चा सुनाई देगी।
दूसरा: डिस्ट्रीब्यूटर्स को NFO बेचने के लिए ज्यादा कमिशन देती है। वो डिस्ट्रीब्यूटर्स को फोर्स करती है कि आप इस NFO में अपने इन्वेस्टर्स का पैसा लगाइए और हम आपको ज्यादा कमिशन देंगे। तो इस ज्यादा NAV के लालच में कुछ डिस्ट्रीब्यूटर्स अपने क्लाइंट्स को फोर्स करते है की वो इस स्कीम में स्विच हो जाए वरना मार्केट में हजारों स्कीम्स पहले से है तो उन सारी स्कीम्स को छोड़ के ये जो एक नया NFO है, जिसका कोई ट्रैक रिकॉर्ड भी नहीं है, तो कोई भी म्यूचुअल फंड डिस्ट्रिब्यूटर जो आपका भला चाहेगा, वो आपको इस नए NFO में जिसका ट्रैक रिकॉर्ड नहीं है, उसमें इन्वेस्ट करने को क्यूँ कहेगा?
तीसरी: Diversification की देखिये नोर्मल्ली इंसान के गोल्स के हिसाब से तीन से पांच स्कीम्स में निवेश करना काफी है। उससे ज्यादा स्कीम्स में निवेश करने से भी फायदा नहीं होता। क्योंकि सारी स्कीम्स में लगभग एक जैसे स्टॉक्स होते हैं अगर वो एक ही कैटगरी के है जैसे अगर लार्ज कैप स्कीम है तो लगभग सारी लार्ज कैप स्कीम्स में काफी स्टॉक सिमिलर होते हैं। ऐसे ही स्मॉलकैप मिडकैप में भी स्कीम तो अलग होती है। बट ज्यादातर उनके पास जो स्टॉक्स होते हैं वो सिमिलर होते हैं। इसलिए एक कैटगरी की एक या दो उससे ज्यादा। स्कीम्स नहीं लेना चाहिए।
आइडियली आपको एक लार्ज कैप, एक मल्टी कैप, एक मिडकैप और एक टैक्स सेविंग फंड का पोर्टफोलियों बनाना चाहिए। इससे ज्यादा डाइवर्सिफिकेशन से कोई खास लाभ होता नहीं है। एजेंट्स डिस्ट्रिब्यूटर्स कई बार अपने क्लाइंट से 7-8-10 स्कीम्स भी दिलवा देते हैं। वो इसलिए ,की देखिये हर म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर के पास उसको म्यूचुअल फंड कंपनी है, टारगेट देती है की इतना टारगेट पूरा करोगे। मेरी स्कीम को इतना बिकवाओगे तो तुमको लंदन घूमने भेजेंगे तो वो अपना टारगेट पूरा करने के लिए अलग अलग म्यूचुअल फंड कंपनियों में उसके टार्गेट्स अलग अलग होते हैं। सब का टारगेट पूरा करने के लिए वह आपको 10 स्कीम्स में इन्वेस्ट करवा देता है ताकि वो लंदन घूमने जा सके।
चौथा: इन्वेस्टमेंट ड्यूरेशन म्यूचुअल फंड में बहुत से लोग ऐसे होते हैं जो हर साल एक स्कीम से दूसरी स्कीम में शिफ्ट होते रहते हैं। देखिये आपने म्यूचुअल फंड में पैसा लगाया है लॉन्ग टर्म वेल्थ क्रिएट करने के लिए और आपने अपने पैसे को दिया है एक्स्पर्ट को तो ऐसे में आपको उसे तीन से 5 साल का मौका तो देना ही चाहिए कि वह फंड में अच्छा परफॉर्मेंस ला सके और आपको अच्छा रिटर्न दे सके।
नहीं तो कई बार अगर हम बहुत इमपेशेंट रहते हैं और जल्दी रिटर्न चाहते हैं। तो 1 साल हम किसी एक स्कीम में रहते हैं। फिर जैसे ही हमारा Passion खत्म होता है, हम उस स्कीम से निकल के किसी दूसरी स्कीम में जाते हैं तो वो पुरानी स्कीम परफॉर्म करने लगती है और ऐसा हमारे साथ हर बार होता रहता है।
तो अगर हम जल्दी-जल्दी Suffer करेंगे तो हमारे रिटर्न सफर करेंगे। इससे बेटर है की स्कीम सलेक्शन अच्छे से की जाए और फिर विश्वास के साथ उस स्कीम में कम से कम तीन से 5 साल तक रोका जाए।
कई बार आपके एजेंट और डिस्ट्रीब्यूटर से हर साल स्कीम स्विच करने को कहेंगे क्योंकि होता यह है कि पिछले साल कोई XYZ स्कीम अच्छा कमिशन दे रही थी। तो तब आपके एजेंट ने वहाँ आपसे इन्वेस्ट करा दिया। अब इस साल। उसमें कमिशन कम हो गया है और एक दूसरी स्कीम है जिसमें कमिशन बढ़ गई। तो वो चाहेगा कि आप उस स्कीम से निकल के अब ये ज्यादा कमिशन मिलने वाली स्कीम्स में आ जाए, ताकि उससे ज्यादा फायदा हो तो इस तरह के अडवाइस को फॉलो ना करे। आप सेफ्ली अपने पैसे को किसी भी अच्छी स्कीम में इनवेस्ट रहने दे।
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