Mutual funds के HIGH RETURNS का राज़ ! Kya Mutual fund Sahi hai ?
दोस्तो क्या म्यूचुअल फंड सिलैक्ट करना आसान है? क्या पास्ट रिकॉर्ड देख के आप म्यूचुअल फंड सलेक्ट कर सकते हैं? kya mutual fund sahi hai? अगर म्यूचुअल फंड पिक करना इतना आसान होता कि पास्ट रिकॉर्ड को देखें, और जिंस भी म्यूचुअल फंड ने पिछले तीन या पांच सालों में अच्छा रिटर्न दिया है, उसे पिक कर लीजिये। अगर ये इतनी आसानी से हो सकता था, तब तो हर म्यूचुअल फंड इन्वेस्टर्स आज करोड़पति होता।
लेकिन ऐसा नहीं हो पाया, क्योंकि पास्ट रिकॉर्ड को देख के म्यूचुअल फंड सलेक्ट करना नहीं है, एक समझदारी वाला डिसिशन। तो आज हम जानेगे म्यूचुअल फंड पिक करने का सही तरीका।
kya mutual fund sahi hai?
अब बात करते हैं इक्विटी म्यूचुअल फंड्स की, क्योंकि ये सारे म्यूचुअल फंड्स भी शेयर बाजार में पैसा लगाते हैं, स्टॉक्स में पैसा लगाते हैं तो जब-जब स्टॉक मार्केट गिरेगा। शेयर बाजार बुरा परफॉर्म करेगा तो ये सारे आपके म्यूचुअल फंड्स भी गिरेंगे ही। इन्हें गिरने से कोई नहीं रोक सकता।
अब हमे ये ध्यान देना है कि स्कीम्स ऐसी हो जो गिरते मार्केट में कम गिरे। 2002 से लेकर 2007 तक जिन लोगों ने म्यूचुअल फंड में इन्वेस्ट किया था वो जानते है की पांच 5 साल लोग लगातार हर महीने सिप करते रहे। 2002 से 2007 तक रिटर्न भी बहुत अच्छा मिल रहा था, लेकिन उस 1 साल में। पिछले चार 5 साल की सारे रिटर्न्स को ज़ीरो कर दिया था। कई लोगों को तो लॉस भी हो गया था। Kya mutual fund sahi hai? उनकी 5 साल की SIP पे जब मार्केट गिरता है तो म्यूचुअल फंड के आपके सालों के गेम को गायब कर सकता है।
आप इस चीज़ से कैसे बचें?
1. इसका पहला उपाय है रिस्क वर्सिस रिटर्न:
जब आप म्यूचुअल फंड में इन्वेस्ट करने वाले हैं तो स्कीम्स को रिटर्न देखकर सिलैक्ट ना करे जैसा हम सब सिलैक्ट Usually कर लेते हैं। आपको देखना है रिस्क वर्सिस रिटर्न देखिये ज्यादा रिस्क लेके खतरनाक तरीके की कंपनियों और स्टॉक्स में इन्वेस्ट करके तो ज्यादा रिटर्न कोई भी ला सकता है।
लेकिन बुरे समय में गिरते मार्केट में फिर वो रिस्क वो दांव उल्टा भी पड़ता है। Kya mutual fund sahi hai? इसको एक सिंपल सा एग्जाम पल से समझते हैं। एक फंड है जो ज्यादा रिस्क लेके माइक्रो कैप और स्मॉल कैप कंपनीज में निवेश करके 2 साल तक लगातार 50% का रिटर्न ले आता है। यह बहुत ही ज्यादा एग्जाम्पल ले रहा हूँ, इतना रिटर्न शायद ही कोई फंड देता हो, पर देखिये अगर आपने ₹100,लगाये उस फंड में? तो पहले साल आपको 50% का रिटर्न मिला, आपका इन्वेस्टमेंट हो गया 150, अगले साल फिर से उस फंड में आपको 50% का दिया। तो अब आपको वो ₹150 बढ़के हो गया ₹225।
अब दो सालों में आपके ₹100 हो गए? 225 हमें लगेगा ये तो बहुत ही अच्छा रिटर्न है 2 साल में पैसे दोगुने से भी ज्यादा तो अब तीसरे साल मार्केट हो जाता है क्रैश और यही फंड गिर जाता है 50% तो इस फंड ने 2 साल 50% ये फंड बढ़ा और तीसरे साल 50% गिरा, लेकिन जब 225 से वह फंड 50% गिरता है तो गिर के आपके इन्वेस्टमेंट की वैल्यू हो जाती है ₹112।
अब अगर आप 3 साल का रिटर्न देखेंगे तो 3 साल। में आपके रिटर्न। हुए ₹100 के इन्वेस्टमेंट पे आपको मिला ₹112 यानी की 3-3.5% का रिटर्न आपको मिला, जो कि बहुत ही बुरा है। तो देखिये एक फंड जो 2 साल बढ़ता है और केवल 1 साल गिरता है, उससे भी आपका रिटर्न खराब हो जाता है। इसीलिए हमें अपने आपको गिरने से बचाना है।
अब इसको कंपेर करते हैं कैसे? फंड से जो रिस्क कम लेता है इसलिए वो उन दो सालों में बढ़ा तो 20-20% ही तो पहले साल आपके 100 हो गए, 120 और अगले साल वो हो गए बढ़के 144 तो इसके बाद तीसरे साल वो गिरता भी कम है।
अब सपोज़ करिए वो 10% ही गिरा तो अब 3 साल बाद आपके ₹100 हो गए 130। तो इस फंड ने आपको 3 साल में लगभग 9% का रिटर्न दिया। इसीलिए मार्केट में ज्यादा रिटर्न से जरूरी हैं ज़्यादा सेफ्टी। अगर आपने सेफ्टी रख ली रिटर्न अपने आप अच्छा आ जाएगा लेकिन।
2.अब आपका सवाल आ सकता है :
जो रिस्की फंड है उसका फंड मैनेजर जब देखता है कि मार्केट गिर रहा है, तो वो टाइम पे शेयर्स को बेच के लॉस होने से बचा भी तो सकता है? इसमें भी एक समस्या है, ये जो स्मॉल कैप फंड है क्योंकि यह बहुत ही छोटी कंपनियों में निवेश करते हैं तो उनमें लिक्विडिटी ज्यादा नहीं होती, और म्यूचुअल फंड के पास तो इन कंपनियों के हजारों लाखों शेयर होते हैं।
अब अगर फंड मैनेजर को ये पता भी हैं की मार्केट गिरने वाला है, और जैसे ही वो किसी शेयर को बेच के उस कंपनी से निकलने की कोशिश करता है, तो तुरंत क्योंकि कोई म्यूचुअल फंड बेच रहा है, उस कंपनी में सर्किट लग जाता है। यानी उस दिन के लिए उस कंपनी के कोई भी शेयर्स म्यूचुअल फंड चाह कर भी बेच ही नहीं पाता।
और इसीलिए क्योंकि म्यूचुअल फंड के पास लाखों शेयर्स है तो उसको अपने पूरे शेयर्स बेचते बेचते कई बार महीनों निकल जाते हैं, तब तक वो शेयर का प्राइस गिर के नीचे आ जाता है और जितना उस म्यूचुअल फंड ने उस छोटी कंपनी में निवेश करके कमाया था। वो सब कुछ खत्म हो जाता है। Kya mutual fund sahi hai?
जब हम खुद डाइरेक्टली छोटी कम्पनीज़ के शेयर खरीदते बेचते हैं, तो ये लिक्विडिटी प्रॉब्लम हमें कभी आती नहीं है क्योंकि हम कुछ 100 शेयर्स खरीद लेते हैं तो हमें पता ही नहीं चलता कि शेयर में लिक्विडिटी कमी है।
लेकिन जब म्यूचुअल फंड बुरे समय में बेचने जाए और मार्केट गिर रहा है, तो ऐसे टाइम पे इन छोटी कंपनियों के शेयर को खरीदेगा कौन? अब अगर कोई खरीदेगा ही नहीं, वो भी लाखों की क्वांटिटी कौन खरीदेगा? तो अगर खरीदेगा ही नहीं तो म्यूचुअल फंड्स बेचेंगे कैसे? और ऐसा एक म्यूचुअल फंड नहीं जब 10-20-50 म्यूचुअल फंड एक साथ इन कंपनियों को बेचना चाहते हैं तो सामने कोई खरीददार मिलता ही नहीं और ये सारे स्मॉल कैप माइक्रो कैप फंड उन कंपनियों के साथ फंस जाते हैं।
3.अब तीसरा सवाल आ सकता है:
फिर ऐसे गिरते वाले टाइम पे ऐसे पैनिक वाले टाइम में फंड मैनेजर्स अपने शेयर्स बेचेंगे ही क्यों? वो होल्ड करके रखेंगे जब तक मार्केट सुधार ना जाये। तो फंड मैनेजर्स ऐसा भी नहीं कर सकते क्योंकि वो तो आपका पैसा इन्वेस्ट किये रहते हैं।
म्यूचुअल फंड का खुद का पैसा तो कुछ नहीं है और जब मार्केट गिरता है जब इकॉनमी में प्रॉब्लम आती है तो लोगों का बिज़नेस ठंडा होता है। लोगों के जॉब चाहते हैं तो ऐसे में वो सोचते है की इस टाइम पे हमने जो म्यूचुअल फंड या शेरज़ खरीद कर रखे थे, उसको रिडीम कर लेना चाहिए।
वहाँ से पैसा वापस बुला लेना चाहिए ताकि घर चलता रहे या फिर आप इसलिए भी रिडीम करना चाह सकते हैं की आपको लग रहा है की मार्केट और गिर सकता है तो आप अपने लॉस बचाना चाहते हैं, अपने प्रॉफिट बुक करना चाहते हैं और आपने स्कीम्स को बोल देते है की हमको हमारा पैसा वापस करो।
अब अगर आप से अपना पैसा वापस बुला लिया तो फंड मैनेजर की मजबूरी हो जाती है की वो शेयर को बेचे और आपको आपका पैसा दे और ऐसे में फंड मैनेजर चाह के भी वो शेयर को अपने पास रख नहीं सकता, क्योंकि लोगों ने अपने पैसे मांग लिए है तो फंड मैनेजर को चाहे किसी भी दाम पे हो वो शेयर्स बेच के आपको आपके पैसे वापस करने पड़ेंगे।
पर वो शेयर्स बिकते ही नहीं और लिक्विडिटी प्रॉब्लम आती है जिससे माहौल खराब होता है, Kya mutual fund sahi hai? लोगों में डर होता है की कही हमारे म्यूचुअल फंड के साथ भी ऐसा ना हो जाए की हम पैसा मांगे और म्यूचुअल फंड शेयर बेच ही ना पाए तो और लोग पैनिक करके जल्दी जल्दी रिडीम करना चाहते हैं शेयर्स, जिस कारण म्यूचुअल फंड्स बहुत ज्यादा गिर जाते हैं।
जितना ज्यादा म्यूचुअल फंड्स अपने शेयर बेचने की कोशिश करेंगे उतना ज्यादा मार्केट गिरेगा। जितना ज्यादा मार्केट गिरेगा उतनी ज्यादा रिडम्पशन रिक्वेस्ट आएँगे एजेंट हो या बैंक के कर्मचारी, वो तो आपको अट्रैक्ट कर देंगे। पिछले दो या 3 साल के अच्छे रिटर्न्स दिखाके की स्मॉलकैप फंड से सबसे ज्यादा रिटर्न दिया है, इन्हीं में इन्वेस्ट करिए।
लेकिन उनसे पूछिए कि ज़रा इस स्मॉल कैप स्कीम का मुझे 2007 या आठ का रिकॉर्ड दिखाना उस समय इस स्कीम को कितना लॉस हुआ था? ये चीज़ वो आपको कभी नहीं बताएंगे कि बुरे मार्केट में ये स्कीम्स में कितना लॉस हो सकता है। सालों की सेविंग जा सकती तो स्कीम खरीदते समय केवल अच्छे समय का अच्छा परफॉरमेंस ना देखे। बुरे समय में उस फंड ने कितना अच्छा या बुरा परफॉर्म किया है, यह देखना ज्यादा जरूरी है।
क्योंकि आपको 2% रिटर्न कम मिले वो चलेगा लेकिन अगर 10% लॉस ज्यादा हो गया वो आपसे सहन नहीं होगा। अब कुछ लोग होते है जब म्यूचुअल फंड खरीदते है। स्टार रेटिंग्स देख के कुछ वेबसाइट्स हैं जो म्यूचुअल फंड को स्टार रेटिंग देती है तो लोग फाइव स्टार फंड खरीदना पसंद करते हैं। देखिये ये जो स्टार रेटिंग है, यह म्यूचुअल फंड के पास्ट परफॉर्मेंस के कारण उसे मिली है, पिछले दो, तीन या 5 साल के परफॉर्मेंस से।
अब जैसे जिंस बैट्समैन ने पिछले मैच में सेंचुरी मारी हैं तो इसकी कोई गारंटी नहीं है कि वो अगले मैच में भी सेंचुरी मरे। वैसे ही जिंस फंड ने पिछले कुछ साल परफॉर्म किया है। जरूरी नहीं है की वो आगे भी परफॉर्म करे तो ब्लाइंडली स्टार रेटिंग देख के स्कीम खरीदना भी Kya mutual fund sahi hai? है।
अब आपको कैसे पसंद करनी है अच्छी सकीम्स? उसका सबसे इम्पोर्टेन्ट क्राइटिरिया है की आपको फंड का 10-15 या 20 साल का ट्रैक रिकॉर्ड देखना है, की बुरे समय में अच्छे समय में हर समय पिछले 15-20 सालों में उस फंड ने कैसा परफॉर्म किया है? और इसीलिए एनएफओ में म्यूचुअल फंड में जिनको एक या 2 साल ही हुआ है, जिन्होंने केवल अच्छा समय ही देखा है, उन फंड्स में इन्वेस्ट करने से बचें।
क्योंकि वो अनटेस्टेड फंड है। दूसरी सबसे जरूरी चीज़ फंड मैनेजर जरूरी ये नहीं है कि स्कीम का नाम क्या है? उसने पहले कैसे परफॉर्म किया है? जरूरी यह है कि पहले उस फंड को कौन मैनेज कर रहा था और आज उस फंड को कौन मैनेज कर रहा है? जैसे आईसीआईसीआई वैल्यू डिस्कवरी में आज से 2 साल पहले तक बहुत अच्छा परफॉर्मेंस किया था, वो थे एस नरेन, जो की बहुत ही माने हुए फंड मैनेजर है।
लेकिन 2 साल पहले उन्होंने उस फंड को मैनेज करना बंद कर दिया और तब से वो फंड अंडरपरफॉर्म कर। रहा है। देखिये। मार्केट में जब आप किसी से एडवाइस लेते हैं तो आप ये देखते है की ऐडवाइज़र अच्छा है की नहीं, आप उस पर विश्वास कर सकते हैं की नहीं? किसी भी अडवाइज़र की बात तो आप नहीं मान लेते, वैसे ही फंड का नाम चाहे वो ही हो। फंड अच्छा परफॉर्म करेगा या बुरा वो डिपेंड करता है, कि फंड मैनेजर वही है, या वो बदल गया है।
तो फंड मैनेजर की आपको सारी डिटेल्स वैल्यू रिसर्च नाम की वेबसाइट पे मिल जाएगी। उनका पास्ट इक्स्पिरीयन्स पहले उन्होंने कौन से फंड मैनेज किये है? वो कितने सक्सेसफुल रहे हैं? ये सबकुछ आपको मिल जायेगा।
जैसे हॉर्स रेसिंग में आप घोड़े पे नहीं घुड़सवार पे बैट करते हैं। उसी तरह आपका फंड मैनेजर आपके फंड का घुड़सवार है अगर वो अच्छा तो आपका फंड अच्छा। एक गोल्डन रूल देता हूँ अगर आप कभी बैंक जाये, कभी किसी एजेंट के पास जाए तो यह चीज़ मान के चलिए कि जो फंड वो आप को खरीदने के लिए बोल रहा है, जो फंड वो आपको बेच रहा है वो फंड कभी मत खरीदना, क्योंकि वो इसलिए आपको रिकमेंड कर रहा है क्योंकि उसमें कमिशन सबसे ज्यादा है। Kya mutual fund sahi hai?
अब अगर आप किसी ऐसे के पास गए है जैसे बैंक के एजेंट. जिनको कमिशन मिलता है फंड बेचने का. तो उनके रिकमेंडेड फंड्स पे मत जाईये, वो आपका भला नहीं खुद का भला सोच रहे हैं।
4.चौथी चीज़ ये देखे कि फंड में ज्यादा बहुत ज्यादा स्टॉक्स ना हो:
कुछ फंड ऐसे होते है जिसमें 70-80-90 स्टॉक्स होते है। इतने ज्यादा अगर स्टॉक्स होंगे तो किसी एक कंपनी, दो कंपनी के अच्छा करने का बेनिफिट फंड को नहीं मिल पायेगा क्योंकि एक स्टॉक में उस फंड की होल्डिंग बहुत कम है। तो आपको चाहिए ऐसे म्यूचुअल फंड जो केवल 25-30 अच्छे स्टॉक्स में जिन्होंने निवेश किया हो ताकि अगर वो कंपनियां अच्छा करे तो फंड का NAB भी सच में बढ़ पाए। Kya mutual fund sahi hai?
5.इसके अलावा पांचवीं चीज़ टर्न ओवर :
हर साल वो म्यूचुअल फंड कितनी पुरानी कंपनियों को बेचता है और कितनी नई कंपनियों को खरीदता है? आपको ऐसा फंड मैनेजर चाहिए जो इन्वेस्टर हो जो कंपनियों में बार बार खरीदी बेची ना करें, क्योंकि इससे म्यूचुअल फंड के खर्च तो बढ़ेंगे और आपकी NAB को नुकसान पहुंचेगा।
आपको ऐसा फंड मैनेजर ढूंढना है जो लंबे समय तक अपने स्टॉक्स को होल्ड करे, जो अपनी पसंद में विश्वास दिखाए तो टर्न ओवर किसी फंड का कितना हैं ये भी आपको वैल्यू रिसर्च में मिल जाएगा। जितना ज्यादा टर्नओवर Usefully उतना बुरा होता है, टॉक्स का PE देखते हैं, स्टॉक्स का प्राइस टु बुक वैल्यू देखते हैं।
उसी तरह म्यूचुअल फंड का भी PE देखें। इससे कई बार ये सही सही अंदाजा लग जाता है, कि kya mutual fund sahi hai? म्यूचुअल फंड के पास जो कंपनियां हैं वो अब बहुत महंगी हो चुकी हैं, या अभी भी अगर फंड का PE कम है तो मतलब उस फंड में जो कंपनियां हैं वो ओवरवैल्यूड नहीं है, और अगर फंड की कंपनियां Honestly वैल्यूड है या अंडरवैल्यूड है तो आप श्योर हो सकते हैं कि फ्यूचर में भी अच्छा रिटर्न मिलेगा।
ये ऐसा है की ₹1000 का एक नोट हो या 100, 100 के 10 बात तो एक ही है NAB कम हो या ज्यादा कोई फर्क नहीं पड़ता।
अगर आप जानना चाहते हैं कि मुझे कौन से फंड हैं पसंद कौन से फंड में आपको निवेश करना चाहिए? kya mutual fund sahi hai तो आप मेरे अगले पोस्ट का इंतज़ार करिएगा नया पोस्ट जल्दी लेकर आऊंगा। और अगर आप सीखना चाहते हैं खुद अच्छे स्टॉक्स पिक करना खुद एक रीप्यूटिड सक्सेसफुल वैल्यू इन्वेस्टर बनना तो आप बने रहिये मेरी इस वेबसाइट पर सब्सक्राइब कर सकते हैं।
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